सम्राट विक्रमादित्य सम्मान
सम्राट विक्रमादित्य सम्मान के लिए निम्नलिखित नियम एवं प्रक्रिया निर्धारित है।
पुरस्कार राशि
अंतर्राष्ट्रीय सम्मान के अंतर्गत पुरस्कार के रूप में ₹1 करोड़ 1 लाख की राशि के साथ प्रशस्ति पत्र एवं सम्मान पट्टिका प्रदान की जायेगी।
सम्मान का नाम
यह सम्मान सम्राट विक्रमादित्य अंतर्राष्ट्रीय सम्मान के नाम से जाना जावेगा।
उद्देश्य
यह सम्मान सम्राट विक्रमादित्य के बहुविध गुणों - न्याय, दानशीलता, सुशासन, खगोल एवं ज्योतिष विज्ञान, कला, शौर्य, राजनय, आध्यात्म, युग निर्माण, विश्व मानव कल्याण, समाज अभ्युदय, अंतर्राष्ट्रीय भाई-चारा, सर्वधर्म समन्वय, भारतीय संस्कृति के उत्थान, सामाजिक नवोन्मेष, भारतीय दर्शन, धर्म, परम्परा, वेदांत के व्यापक प्रचार-प्रसार, रचनात्मक एवं जनकल्याणकारी कार्य के क्षेत्र में श्रेष्ठतम उपलब्धियों एवं उल्लेखनीय योगदान करने वाले साधनारत व्यक्ति / संस्था को सम्मानित करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया।
संख्या
यह सम्मान प्रति वर्ष प्रदान किया जायेगा। यह एकल सम्मान होगा अर्थात् यह सम्मान संयुक्त रूप से नहीं दिया जायेगा।
सम्मान की राशि
राशिइस सम्मान के अंतर्गत पुरस्कार के रूप में रुपये 101.00 लाख (रुपये एक करोड एक लाख) की राशि के साथ प्रशस्ति पत्र एवं सम्मान पट्टिका प्रदान की जायेगी।
पात्रता
यह सम्मान युग निर्माण, विश्व मानव कल्याण, समाज अभ्युदय, अंतर्राष्ट्रीय भाई-चारा, सर्वधर्म समन्वय, भारतीय संस्कृति के उत्थान, सामाजिक नवोन्मेष, भारतीय दर्शन, धर्म, न्याय, परम्परा एवं वेदांत के व्यापक प्रचार-प्रसार, श्रेष्ठतम उपलब्धियों एवं उल्लेखनीय योगदान करने वाले साधनारत व्यक्ति/संस्था को दिया जायेगा।
अन्य शर्ते
सम्मान के लिए देश-विदेश के युग निर्माण विश्व कल्याण एवं न्याय के क्षेत्र में कार्य करने वाले विभिन्न व्यक्तियों, संस्थाओं, समाजशास्त्रियों, बुद्धिजीवियों, लेखकों, समीक्षकों, पत्रकारों से सम्मान हेतु अनुशंसा/नामांकन की प्रविष्टियाँ आमंत्रित की जाएंगी।
चयन प्रक्रिया
सम्मान के चयन के लिए प्रति वर्ष उच्च स्तरीय निर्णायक मंडल का गठन महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के प्रस्ताव पर माननीय मुख्यमंत्री जी के अनुमोदन से मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा किया जावेगा। निर्णायक मंडल में माननीय मुख्यमंत्री जी अध्यक्ष, एवं संस्कृति मंत्री, मध्यप्रदेश शासन, मुख्य सचिव, मध्यप्रदेश शासन स्थायी सदस्य के रूप में सम्मिलित रहेंगे। निर्णायक मंडल में देश-प्रदेश के प्रतिष्ठित समाजसेवी, बुद्धिजीवियों, समाजशास्त्रियों, लेखकों, पत्रकारों, उद्योगपतियों, न्यायाधीशों, पुरातत्वविद्, चिकित्सक एवं विशेषज्ञों को सम्मिलित किया जायेगा। सदस्यों को आमंत्रण तथा बैठक के संयोजन की कार्यवाही निदेशक, महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा की जावेगी।
- 1सम्मान चयन के लिए न्यूनतम दस सदस्यीय निर्णायक मंडल का गठन किया जायेगा। कोरम के लिए सात सदस्यों की उपस्थिति एवं निर्णय में सहभागिता आवश्यक होगी।
- 2सम्मान के चयन का मापदण्ड सम्बन्धित क्षेत्र में उच्च कोटि की सृजनात्मकता, विशिष्ट उपलब्धि, अनवरत साधना तथा असंदिग्ध एवं निरपवाद योगदान रहेगा। चयन के समय अनुशंसित व्यक्ति / संस्था का सृजनात्मक रूप से सक्रिय होना अनिवार्य है।
- 3निर्णायक मंडल के समक्ष प्रस्तुत प्रविष्टियों/अनुशंसाओं के अतिरिक्त निर्णायक मंडल स्वविवेक से अन्य नामों पर विचार करने हेतु स्वतंत्र होगा।
- 4यदि निर्णायक मंडल सम्मान के लिए किसी भी व्यक्ति/संस्था को उपयुक्त नहीं पाता है तो उस वर्ष यह सम्मान किसी को नहीं दिया जा सकेगा।
- 5इस सम्मान से एक बार सम्मानित व्यक्ति/संस्था को पुनः यह सम्मान प्रदान नहीं किया जायेगा।
- 6निर्णायक मंडल सर्वसम्मति से निर्णय लेकर अपनी अनुशंसा राज्य शासन को प्रस्तुत करेगा। निर्णायक मंडल का निर्णय शासन के लिए बंधनकारी होगा।
- 7निर्णायक मंडल की अनुशंसा पर शासन की स्वीकृति प्राप्त होने के पश्चात ही यह सम्मान घोषित किया जावेगा।
- 8सम्मान घोषित हो जाने के बाद, सम्मानित व्यक्ति/संस्था द्वारा इसे स्वीकार न किये जाने पर उस वर्ष किसी अन्य को यह सम्मान नहीं दिया जा सकेगा।
- 9विशिष्ट परिस्थितियों में यदि निर्णायक मंडल सर्वसम्मति से निर्णय लेने में असमर्थ रहता है और एक से अधिक अनुशंसाएं प्रस्तुत करता है तो ऐसी स्थिति में शासन को निर्णायक मंडल की अनुशंसा अस्वीकार करने का अधिकार होगा।
संवितरण अधिकारी
यह सम्मान प्रति वर्ष सचिव, महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ मध्यप्रदेश द्वारा वितरित किया जायेगा।

